Psalm 14:1 in Hindi

Hindi Hindi Bible Psalm Psalm 14 Psalm 14:1

Psalm 14:1
मूर्ख ने अपने मन में कहा है, कोई परमेश्वर है ही नहीं। वे बिगड़ गए, उन्होंने घिनौने काम किए हैं, कोई सुकर्मी नहीं।

Psalm 14Psalm 14:2

Psalm 14:1 in Other Translations

King James Version (KJV)
The fool hath said in his heart, There is no God. They are corrupt, they have done abominable works, there is none that doeth good.

American Standard Version (ASV)
The fool hath said in his heart, There is no God. They are corrupt, they have done abominable works; There is none that doeth good.

Bible in Basic English (BBE)
<To the chief music-maker. Of David.> The foolish man has said in his heart, God will not do anything. They are unclean, they have done evil works; there is not one who does good.

Darby English Bible (DBY)
{To the chief Musician. [A Psalm] of David.} The fool hath said in his heart, There is no God. They have corrupted themselves, they have done abominable works: there is none that doeth good.

Webster's Bible (WBT)
To the chief Musician, A Psalm of David. The fool hath said in his heart, There is no God. They are corrupt, they have done abominable works, there is none that doeth good.

World English Bible (WEB)
> The fool has said in his heart, "There is no God." They are corrupt. They have done abominable works. There is none who does good.

Young's Literal Translation (YLT)
To the Overseer. -- By David. A fool hath said in his heart, `God is not;' They have done corruptly, They have done abominable actions, There is not a doer of good.

there
is
אָ֘מַ֤רʾāmarAH-MAHR
is
There
נָבָ֣לnābālna-VAHL
hath
said
The
בְּ֭לִבּוֹbĕlibbôBEH-lee-boh
fool
his
in
אֵ֣יןʾênane
heart,
אֱלֹהִ֑יםʾĕlōhîmay-loh-HEEM
no
God.
corrupt,
הִֽשְׁחִ֗יתוּhišĕḥîtûhee-sheh-HEE-too
are
They
they
abominable
הִֽתְעִ֥יבוּhitĕʿîbûhee-teh-EE-voo
done
עֲלִילָ֗הʿălîlâuh-lee-LA
have
works,
none
אֵ֣יןʾênane
that
doeth
עֹֽשֵׂהʿōśēOH-say
good.
טֽוֹב׃ṭôbtove

Cross Reference

भजन संहिता 10:4
दुष्ट अपने अभिमान के कारण कहता है कि वह लेखा नहीं लेने का; उसका पूरा विचार यही है कि कोई परमेश्वर है ही नहीं॥

रोमियो 3:10
जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं।

उत्पत्ति 6:5
और यहोवा ने देखा, कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है सो निरन्तर बुरा ही होता है।

उत्पत्ति 6:11
उस समय पृथ्वी परमेश्वर की दृष्टि में बिगड़ गई थी, और उपद्रव से भर गई थी।

लूका 12:20
परन्तु परमेश्वर ने उस से कहा; हे मूर्ख, इसी रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा: तब जो कुछ तू ने इकट्ठा किया है, वह किस का होगा?

रोमियो 1:21
इस कारण कि परमेश्वर को जानने पर भी उन्होंने परमेश्वर के योग्य बड़ाई और धन्यवाद न किया, परन्तु व्यर्थ विचार करने लगे, यहां तक कि उन का निर्बुद्धि मन अन्धेरा हो गया।

इफिसियों 2:1
और उस ने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे।

मत्ती 15:19
क्योंकि कुचिन्ता, हत्या, पर स्त्रीगमन, व्यभिचार, चोरी, झूठी गवाही और निन्दा मन ही से निकलतीं है।

यूहन्ना 3:19
और दंड की आज्ञा का कारण यह है कि ज्योति जगत में आई है, और मनुष्यों ने अन्धकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना क्योंकि उन के काम बुरे थे।

इफिसियों 2:12
तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे।

तीतुस 1:16
वे कहते हैं, कि हम परमेश्वर को जानते हैं: परअपने कामों से उसका इन्कार करते हैं, क्योंकि वे घृणित और आज्ञा न मानने वाले हैं: और किसी अच्छे काम के योग्य नहीं॥

तीतुस 3:3
क्योंकि हम भी पहिले, निर्बुद्धि, और आज्ञा न मानने वाले, और भ्रम में पड़े हुए, और रंग रंग के अभिलाषाओं और सुखविलास के दासत्व में थे, और बैरभाव, और डाह करने में जीवन निर्वाह करते थे, और घृणित थे, और एक दूसरे से बैर रखते थे।

प्रकाशित वाक्य 21:8
पर डरपोकों, और अविश्वासियों, और घिनौनों, और हत्यारों, और व्यभिचारियों, और टोन्हों, और मूर्तिपूजकों, और सब झूठों का भाग उस झील में मिलेगा, जो आग और गन्धक से जलती रहती है: यह दूसरी मृत्यु है॥

मत्ती 12:34
हे सांप के बच्चों, तुम बुरे होकर क्योंकर अच्छी बातें कह सकते हो? क्योंकि जो मन में भरा है, वही मुंह पर आता है।

यशायाह 1:4
हाय, यह जाति पाप से कैसी भरी है! यह समाज अधर्म से कैसा लदा हुआ है! इस वंश के लोग कैसे कुकर्मी हैं, ये लड़के-बाले कैसे बिगड़े हुए हैं! उन्होंने यहोवा को छोड़ दिया, उन्होंने इस्राएल के पवित्र को तुच्छ जाना है! वे पराए बनकर दूर हो गए हैं॥

नीतिवचन 27:22
चाहे तू मूर्ख को अनाज के बीच ओखली में डाल कर मूसल से कूटे, तौभी उसकी मूर्खता नहीं जाने की।

अय्यूब 15:16
फिर मनुष्य अधिक घिनौना और मलीन है जो कुटिलता को पानी की नाईं पीता है।

अय्यूब 22:13
फिर तू कहता है कि ईश्वर क्या जानता है? क्या वह घोर अन्धकार की आड़ में हो कर न्याय करेगा?

भजन संहिता 36:1
दुष्ट जन का अपराध मेरे हृदय के भीतर यह कहता है कि परमेश्वर का भय उसकी दृष्टि में नहीं है।

भजन संहिता 52:1
हे वीर, तू बुराई करने पर क्यों घमण्ड करता है? ईश्वर की करूणा तो अनन्त है।

भजन संहिता 53:1
मूढ़ ने अपने मन में कहा है, कि कोई परमेश्वर है ही नहीं। वे बिगड़ गए, उन्होंने कुटिलता के घिनौने काम किए हैं; कोई सुकर्मी नहीं॥

भजन संहिता 73:3
क्योंकि जब मैं दुष्टों का कुशल देखता था, तब उन घमण्डियों के विषय डाह करता था॥

भजन संहिता 92:6
पशु समान मनुष्य इस को नहीं समझता, और मूर्ख इसका विचार नहीं करता:

भजन संहिता 94:4
वे बकते और ढ़िठाई की बातें बोलते हैं, सब अनर्थकारी बड़ाई मारते हैं।

भजन संहिता 107:17
मूढ़ अपनी कुचाल, और अधर्म के कामों के कारण अति दु:खित होते हैं।

नीतिवचन 1:7
यहोवा का भय मानना बुद्धि का मूल है; बुद्धि और शिक्षा को मूढ़ ही लोग तुच्छ जानते हैं॥

नीतिवचन 1:22
हे भोले लोगो, तुम कब तक भोलेपन से प्रीति रखोगे? और हे ठट्ठा करने वालो, तुम कब तक ठट्ठा करने से प्रसन्न रहोगे? और हे मूर्खों, तुम कब तक ज्ञान से बैर रखोगे?

नीतिवचन 13:19
लालसा का पूरा होना तो प्राण को मीठा लगता है, परन्तु बुराई से हटना, मूर्खों के प्राण को बुरा लगता है।

1 शमूएल 25:25
मेरा प्रभु उस दुष्ट नाबाल पर चित्त न लगाए; क्योंकि जैसा उसका नाम है वैसा ही वह आप है; उसका नाम तो नाबाल है, और सचमुच उस में मूढ़ता पाई जाती है; परन्तु मुझ तेरी दासी ने अपने प्रभु के जवानों को जिन्हें तू ने भेजा था न देखा था।